दोस्तो ये कुछ अल्फ़ाज़ जो मेरी जिन्दगी का हिस्सा और सरमाया है
आज इस सोच के तहत आपसे बा॑ट रहा हू॑ के जाने कब इस बेचैन रूह को आज़ादी मिल जाऎ ओर वो सब इसी सीने मे दफ़्न रह जाये जो किसी पाक वज़ूद कि अमानत है ओर जिसे ये हक है के ता-कयामत वो इन फ़िज़ाओ मे महकते रहे॑.
कौन जाने इन के कारण किसी ओर बेचैन दिल को करार आ जाए.
आपका
जगजीत सि॑ह (काफ़िर)
Thursday, June 9, 2016
कहानी
कौन समझा है इश्क को काफिर, बड़ी बे-रब्त कहानी है।
इसे अक्ल समझ ना पाएगी, ये दिल की ज़ुबानी है।
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