ग़ज़ल غزل
मुस्तकबिल के ख्वाब सजाना मुश्किल है
अब यादों से दिल बहलाना मुश्किल है
जिन गलियों में यार का दामन छूटा था
उन गलियों में आना जाना मुश्किल है
कुछ किरदार निभाए इतनी शिद्दत से
मेरा अपने आप में आना मुश्किल है
आवाज़ों से ज़ख्म हुए हैं कुछ ऐसे
सन्नाटों को भी सुन पाना मुश्किल है
आंसू तो छिप सकते हैं इस दुनिया से
लेकिन दिल की आह छिपाना मुश्किल है
गफ़लत के जो लम्हें ज़िल्लत दे जाएं
उन लम्हों का बोझ उठाना मुश्किल है
मक़तल में इक शर्त उठी थी तौबा की
हंस कर बोला इक दीवाना, मुश्किल है
इस दुनिया में सब कुछ आसां है काफ़िर
बस इक सच्चा इश्क़ कमाना मुश्किल है
مستقبل کے خواب سجانا مشکل ہے
اب یادوں سے دل بہلانا مشکل ہے
جن گلیوں میں یار کا دامن چھوٹا تھا
اُن گلیوں میں آنا جانا مشکل ہے
کچھ قردار نبھائے اتنی شدت سے
میرا اپنے آپ میں آنا مشکل ہے
آوازوں سے زخم ہوئے ہیں کچھ عاسے
سناٹوں کو بھی سن پانا مشکل ہے
آنسو تو چھپ سکتے ہیں اس دنیا سے
لیکن دل کی آہ چھپانا مشکل ہے
غفلت کے جو لمحے ذلت دے جائیں
اُن لمہوں کا بوجھ اٹھانا مشکل ہے
مقتل میں اک شرط اُٹھی تھی توبہ کی
ہنس کر بولا اک دیوانا مشکل ہے
اس دنیا میں سب کچھ آساں ہے کافر
بس اِک سچا عشق کمانا مشکل ہے
جگجیت کافر / जगजीत काफ़िर