Tuesday, August 25, 2015

मेरे हमसफर

Dedicated to my loving wife

मेरे हमसफर
उम्र की इस राहगुज़र पे,
इक लम्बा वक्त बिताया हमने।
पाओं के सिसकते छालों को,
अश्कों से सहलाया हमने।
तेरी मेरी आंखो में,
साये थे चन्द सवालों के।
उम्मीद के चन्द खिलौनों से,
इक दूजे को बहलाया हमने ।
कुछ ख्वाब पकड़ के मुट्ठी में,
अंबर की ओर उछाले हमने ।
कुछ दूर खला में जा पहुंचे,
कुछ को कामिल पाया हमने ।
वो दौर के जब तन्हा थे हम,
रिश्तों के इस जंगल में। 
आग़ोश में इक दूजे के खुद को,
महफूज़ सलामत पाया हमने ।
बस यूं ही देना साथ मेरा,
मेरे आखिरी लम्हे तक हमदम।
जायें तो ये शुक्र करें,
कि तुम्हे खुदा से पाया हमने ।

J S Kaafir

4/8/2015

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